Monday, October 10, 2016

Hanuman Chalisa In Hindi

Lord Hanuman is well known for his extreme devotion to Lord Rama. Lord Hanuman is always depicted in the Indian folklaire as an icon of true devotion and a symbol of the power of true devotion and chastity.
Lord Hanuman's devotion to Lord Rama is symbolic of the devotion of the enlightened individual soul towards the supreme soul.
Many stories from the Indian literature tell the tales of Lord Hanuman protecting devotees of Lord Rama and helping those who seek his either spiritually or otherwise. Swami Tulasidas has written these lines in respect of Lord Hanuman's great character, in praise of his powers and also devotion.



Hanuman Chalisa In Hindi:



दोहा 

श्री गुरु चरण सरज राज , निज मनु मुकुर सुधारे |
बरनौ रघुबर बिमल जासु , जो धयक फल चारे ||

बुधिहिएँ तनु जानके , सुमेराव पवन -कुमार |
बल बूढी विद्या देहु मोहे , हरहु कलेस बिकार ||


चोपाई 

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर |
जय कपिसे तहु लोक उजागर ||

राम दूत अतुलित बल धामा |
अनजानी पुत्र पवन सूत नामा ||

महाबीर बिक्रम बज्रगी |
कुमति निवास सुमति के संगी ||

कंचन बरन बिराज सुबेसा |
कण कुंडल कुंचित केसा ||

हात वज्र औ दहेज बिराजे |
कंधे मुज जनेऊ सजी ||

संकर सुवन केसरीनंदन |

विद्यावान गुने आती चतुर |
राम काज कैबे को आतुर ||

प्रभु चरित सुनिबे को रसिया |
राम लखन सीता मान बसिया ||

सुषम रूप धरी सियाही दिखावा |
बिकट रूप धरी लंक जरावा ||

भीम रूप धरी असुर सहरइ |
रामचंद्र के काज सवारे ||

लाये संजीवन लखन जियाये |
श्रीरघुवीर हर्षा उरे लाये ||

रघुपति किन्हें बहुत बड़ाई |
तुम मम प्रिये भारत सम भाई ||

सहरत बदन तुमर्हू जस गावे |
आस कही श्रीपति कान्त लगावे ||

संकदीक भ्रमधि मुनीसा |
नारद सरद सहित अहिसा ||

जम कुबेर दिगपाल जहा थी |
कवी कोविद कही सके कहा थी ||

तुम उपकार सुघुव कहिन |
राम मिलाये राज पद देंह ||

तुम्रहो मंत्र विभेक्षण मन |
लंकेश्वर भये सब जग जान ||

जुग सहेस जोजन पैर भानु |
लिन्यो ताहि मधुर फल जणू ||

प्रभु मुद्रिका मेली मुख माहि |
जलधि लाधी गए अचरज नहीं ||

दुर्गम काज जगत के जेते |
सुगम अनुग्रह तुमरे तेते ||

राम दुआरे तुम रखवारे |
हूट न आगया बिनु पसरे ||

सब सुख लहै तुम्हरे सरना |
तुम रचक कहू को डारना ||

आपण तेज सम्हारो आपे |
तेनो लोक हकतइ कापे ||

भुत पेसच निकट नहीं आवेह |
महावीर जब नाम सुनावेह ||

नसे रोग हरे सब पीरा |
जपत निरंतर हनुमत बल बीरा ||

संकट से हनुमान चुदावे |
मान कम बचन दायाँ जो लावे ||

सब पैर राम तपस्वी रजा |
तिन के काज सकल तुम सजा ||

और मनोरत जो कई लावे |
टसुये अमित जीवन फल पावे ||

चारो गुज प्रताप तुमारह |
है प्रसिद्ध जगत ujeyara ||

साधू संत के तुम रखवारे |
असुर निकंदन राम दुलारे ||

Ashat सीधी नवनिधि के डाटा |
अस वर दीं जानकी माता ||

राम रसायन तुम्हरे पासा |
सदा रहो रघुपति के दस ||

तुम्रेह भजन राम को भावे |
जनम जनम के दुःख बिस्रावे ||

अंत काल रघुबर पुर जी |
जहा जनम हरी भगत कहेई ||

और देवता चितन धरयो |
हनुमत सेये सर्व सुख करेई ||

संकट कटे मिटे सब पर |
जो सुमेरे हनुमत बलबीर ||

जय जय जय हनुमान गुसाई |
कृपा करो गुरु देव के नाइ ||

जो सैट बार पट कर कोई |
चुतेही बंधी महा सुख होई ||

जो यहे पड़े हनुमान चालीसा |
होए सीधी सा के गोरेसा ||

तुलसीदास सदा हरी चेरा |
कीजेये नाथ हृदये महा डेरा ||

दोहा 

पवंत्नाये संकट हरण , मंगल मूर्ति रूप |
राम लखन सीता सहेत , हृदये बसु सुर भूप ||

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